Shyam Pathak: Salesman से Actor तक का सफर

श्याम पाठक एक भारतीय अभिनेता और हास्य अभिनेता हैं, जिनका जन्म 12 जून 1976 को हुआ था। वे सबसे ज़्यादा लंबे समय तक चलने वाले हिंदी टेलीविज़न सिटकॉम “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” में पत्रकार पोपटलाल का किरदार निभाने के लिए जाने जाते हैं।

प्रारंभिक जीवन

श्याम पाठक का जन्म मुंबई के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें अभिनय के प्रति रुझान था।

Shyam Pathak: Salesman से Actor तक का सफर

मैं स्कूल के नाटकों में हिस्सा लेता था और मुझे खूब सराहना मिलती थी। यही वजह थी कि मुझमें अभिनय क्षेत्र में कदम रखने का जज़्बा पैदा हुआ।

लेकिन श्याम के परिवार वाले चाहते थे कि वह किसी नौकरी में लग जाए। इसलिए श्याम ने मुंबई में कपड़ों की एक दुकान में बिक्री प्रतिनिधि के रूप में काम करना शुरू कर दिया। दिन को नौकरी और रात को कॉलेज की पढ़ाई करते हुए उन्होंने वाणिज्य स्नातक की डिग्री पूरी की।

रंगमंच की ओर

एक दिन श्याम की नज़र मुंबई के नेशनल सेंटर फ़ॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (एनसीपीए) के प्रयोगात्मक रंगमंच पर पड़ी। वहाँ के कलाकारों और माहौल से बहुत प्रभावित हुए। तब से श्याम अपना सारा फुर्सत का समय वहीं बिताने लगे।

श्याम को पता चला कि प्रसिद्ध थिएटर प्रैक्टिशनर बैरी जॉन भी एनसीपीए से जुड़े हुए हैं। एक दिन उन्होंने हिम्मत जुटाकर बैरी जॉन को एक पत्र लिखा। उस पत्र में उन्होंने अपने अभिनय के प्रति लगाव और आर्थिक परेशानी के बावजूद इस क्षेत्र में कदम रखने की इच्छा जाहिर की।

मैंने कभी सोचा नहीं था कि बैरी जॉन जैसे बड़े शख़्सियत मुझे रिप्लाई करेंगे, लेकिन मेरे लिए वाकई वो एक सौभाग्य का पल था।

बैरी जॉन ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और श्याम को छात्रवृत्ति भी प्रदान करने का प्रस्ताव दिया। दुर्भाग्य से श्याम उस समय अपनी सीए की परीक्षाओं की तैयारी में लगे हुए थे इसलिए प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर सके।

परीक्षा समाप्त होते ही श्याम ने बैरी जॉन के रंगमंच समूह में शामिल हो गए और अगले तीन साल तक दिल्ली स्थित बैरी जॉन एक्टिंग स्टूडियो में प्रशिक्षण लिया। 3 साल तक दिल्ली में रंगमंच प्रशिक्षण लेने के बाद श्याम 2004 में मुंबई लौटे। तब से वे लगातार टीवी और फ़िल्मों में काम कर रहे हैं।

टीवी एवं फ़िल्मों में कदम

रंगमंच से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद श्याम पाठक मुंबई लौट आए। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत नाटकों और टीवी शोज़ में काम करके की।

Shyam Pathak: Salesman से Actor तक का सफर
Shyam Pathak early in his career

कुछ उल्लेखनीय शोज़ जिनमें श्याम ने काम किया है:

  • जस्ट मोहब्बत
  • सोन परी
  • बा बहू और बेबी
  • तारक मेहता का उल्टा चश्मा

श्याम ने 2007 में आई हॉलीवुड फिल्म लस्ट, कॉशन में भी अभिनय किया था।

पत्रकार पोपटलाल के रूप में सफलता

टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में श्याम पाठक को पत्रकार पोपटलाल का किरदार निभाने का मौका मिला। यह शो लगातार 14 साल से चल रहा है और श्याम ने इस शो में अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया है।

Shyam Pathak: Salesman से Actor तक का सफर
Shyam Pathak with his family

आज श्याम पाठक पत्रकार पोपटलाल के नाम से जाने जाते हैं और भारतीय टेलीविज़न के सबसे प्रसिद्ध कॉमेडी एक्टर्स में से एक माने जाते हैं।

संघर्षों से भरा सफर

श्याम पाठक की कामयाबी के पीछे उनकी लगन, मेहनत और आत्मविश्वास का बड़ा हाथ है। उनके पास किसी गॉडफ़ादर या संपर्क नहीं थे, न ही किसी ने उनका हाथ थामा।

मेरे पास सिर्फ मेरा प्रतिभा और कड़ी मेहनत थी। इसीलिए मैं हमेशा युवाओं को सलाह देता हूँ कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए इन्हीं चीज़ों पर भरोसा रखें।

  • राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के ऑडिशन प्रक्रिया के दौरान 15-20,000 आवेदकों के बीच चुनौतियों का सामना किया।
  • अंतिम चयन प्रक्रिया के दौरान अपने पिता की मृत्यु की व्यक्तिगत त्रासदी का सामना किया, लेकिन चुन लिया गया।
  • उन्होंने रिज़वी कॉलेज में प्रवेश लेने और 800 प्रतिभागियों वाले एक कार्यशाला में भाग लेने का निर्णय लिया। वक्ता सुबह 9 बजे घर से निकलता था और दोपहर 2 बजे तक नाटक देखना और दोपहर का भोजन आनंद लेना सहित विभिन्न गतिविधियों का आनंद लेता था।
  • 20,406 प्रतियोगियों के बीच एक नाटक में महत्वपूर्ण भूमिका हासिल की और शो के बाद तालियों से सम्मानित किया गया।

आज भी श्याम अपने काम में पूरी तल्लीनता से जुटे हुए हैं और दर्शकों को अपनी अदाकारी से मंत्रमुग्ध करते रहते हैं।

इस तरह श्याम पाठक का सफर एक साधारण बिक्री प्रतिनिधि से लेकर पत्रकार पोपटलाल के रूप में दर्शकों के दिलों पर राज करने तक का रहा है। आने वाले समय में भी वे अपनी अदाकारी के जरिये दर्शकों का मनोरंजन करते रहेंगे।

श्याम का सफर आसान नहीं रहा। उनके पास गॉडफ़ादर न होने के कारण उन्हें कई मुश्किलें झेलनी पड़ी। परिवार के सहयोग के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपनों को साकार किया। आज भी वे निरंतर मेहनत करने की सलाह देते हैं। श्याम पाठक ने अपनी कहानी से हमें यह सीख दी है कि हमें कभी हार मानने की ज़रूरत नहीं।


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